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ये कहानी आज से करीब साल पुरानी है। ये स्टोरी मेरे अंकल की है, जो कि मेरे घर के पास ही रहते थे। मेरी उमर २३ और अंकल की उमर ३३ है। वो मेरे रियल अंकल नहीं थे सिर्फ़ मेरी फ़ैमिली को जानते थे इसलिये मैं उन्हे अंकल कहता था। हम एक दोस्त की तरह थे। हम एक साथ बी ऍफ़ देखते थे। उनका घर और हमारा घर एक ही दीवार से बना हुआ था। मेरा रूम, अंकल के रूम के ठीक बगल वाला था। उनके और मेरे रूम के बीच एक खिड़की थी। अंकल एक गर्ल्स स्कूल टीचर थे। उनके पास कई गर्ल्स टूशन के लिये आती थी। उनके पास - लड़कियां आती थी, उनमे से एक लड़की, नेहा थी। जो कि बहुत दूर से टूशन के लिये आती थी। एक दिन तेज बारिश हो रही थी सब लड़कियां अपने-अपने घर चली गईं। नेहा भी उनके साथ घर जाने के लिये निकली, पर बारिश बहुत हो रही थी इस लिये वो बापस घर में गई उसके कपड़े पूरी तरह भीग गये थे। उसे देख कर अंकल ने कहा कि बारिश रुकने के बाद चली जाना। उसने कहा ठीक है।

फिर अंकल ने उससे कहा कि तुम कपड़े चेंज कर लो। पर अंकल के पास उसके साइज़ के लड़कियों के कपड़े नहीं थे। तो अंकल ने उसे अपनी लुंगी दी और कहा कि "लुंगी को लपेट लो और मैं चाय बना लाता हूं। और अंकल किचन में चले गये। नेहा कमरे में टीवी देख रही थी। उसने लुंगी के नीचे कुछ नही पहना था। वो एकदम नंगी थी। उसके छोटे-छोटे 'दूध' लुंगी के ऊपेर से साफ़ दिख रहे थे। टीवी पर 'ऐड्स ' के बारे में जानकारी रही थी। नेहा ने ये सब पहले नहीं देखा था वो ये सब ध्यान से देखने लगी थी और उसे जोश आने लगा था वो अपने दूधों को हाथ से सहलाने लगी। इतने में अंकल चाय लेके गये।

उन्होने नेहा को देखा तो उनका " लम्बा लंड तनकर लोहे की रोड की तरह कड़ा हो गया। और लुंगी से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा तो अंकल ने लुंगी के अंदर से ही अपनी चड्ढी उतार दी तो उनका लंड से उनकी लुंगी टेंट की तरह तन गई वो चाय लेके नेहा की तरफ़ गये तो नेहा ने पूछा सर आपकी लुंगी को क्या हो गया है। तो अंकल ने कहा कुछ नहीं। किसी को कम कपड़े में देखने पर ऐसा हो जाता है। ये कहते हुए अंकल ने उसकी लुंगी खींच दी और वो पूरी नंगी हो गई उसने कहा ये क्या कर रहे हो सर। कुछ नहीं वही जो तुम अभी कर रही थी। और अगर किसी से कहा तो एकज़ाम में फ़ैल कर दूंगा। तो वो डर गई और चुप हो गई।

अंकल उसके दूध दबाने लगे अब उसे थोड़ा- कुछ हो रहा था। वो सिसकारियां लेने लगी थी और अंकल का लंड अपने हाथ से पकड़ के सहला रही थी। अंकल उसकी चूत पे हाथ घुमा रहे थे। फिर उसकी चूत चाटने लगे उसके मुंह से आह्हह्हह्हह्हह्हह्ह इस्सस्सस्सस्सस्सस म्माज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ाआअ आआयययस जैसी अजीब सी आवाजें रही थी। अब अंकल ने उससे कहा कि वो उनका लंड अपने मुंह में लेके चूसे तो वो मना करने लगी। तब अंकल ने उसके बाल पकड़े और उसे नीचे बैठा दिया और अपना लंड उसके मुंह मुंह में घुसा दिया और अपनी कमर को धीरे से झटका देने लगे। और अपना '' लंड उसके मुंह में डाल दिया। वो अंकल के लंड को चाटने लगी। अब दोनो ६९ की पोजिशन में हो गये। अब नेहा को मजा आने लगा था और वो लंड को जोर जोर से मुंह में अन्दर बाहर करने लगी। अंकल उसकी चूत में अपनी उंगली डाल कर हिला रहे थे। १५ मिनट बाद अंकल ने अपना पानी उसके मुंह में निकाल दिया। तो नेहा ने उल्टी कर दी। और कहा कि आपने अपना लंड, मेरी चूत में तो डाला ही नहीं। अब मुझे मज़ा कैसे आयेगा। क्योंकि अब अंकल का लंड खड़ा नहीं हो रहा था। तो अंकल ने कहा तू परेशान मत हो मैं अभी आया। कह कर वो कपड़े पहन के मेरे पास आये। और मुझे सब कुछ बता दिया।

मैं चलने के लिये तैयार हो गया। मैं उनके घर पहुंचा। तो मैने नेहा को नंगा देखा तो मेरा लंड तुरन्त लोहे की तरह हो गया मैने अपने कपड़े उतार दिये और अपना " का लंड उसके मुंह में देने लगा तो वो कहने लगी कि तुम भी सर की तरह अपना पानी मेरे मुंह में तो नहीं निकालोगे? मैने कहा नहीं निकालूँगा तो वो मेरा लंड चाटने लगी मेरे लंड की टोपी एकदम लाल हो गई मैने अपना लंड उसके मुंह से निकाला और उसे बेड पर पटक दिया। उसकी दोनो टांगों को फ़ैला कर उसके पैरों के बीच में गया और अपना लंड उसकी चूत पर रख कर धक्का मारने लगा पर लंड चूत में अंदर नहीं जा रहा था।

मैने अंकल से कहा थोड़ा तेल लेकर आओ। वो तेल लेके आये तो मैने अपना पूरा लंड तेल से तर कर लिया और उसकी चूत को भी नहला दिया। मैं अपना लंड चूत पर रख के रगड़ने लगा तभी अंकल ने पीछे से जोरदार धक्का दिया तो मेरा पूरा " का लंड एक ही बार में नेहा की कुंवारी चूत में घुस गया। नेहा बहुत जोर से चिल्लाई आऐइएएएईस्सस्स तो मैने लंड बाहर निकाल कर एक जोरदार झटका मारा और दोबारा पूरा लंड चूत में डाल कर चोदने लगा। नेहा भी नीचे से उछल- कर चुदवा रही थी। उसकी चूत खून से तर हो गई थी। वो उस दिन बार झड़ी थी
सुनील मेरा बिजनेस पार्टनर था। एक दिन वो मुझसे बोले कि मैं एक लड़की को जानता हूं और आज ही वो मेरे साथ सिनेमा में गई थी। मैंने पूछा आपको एक दम से कहां से मिल गई लड़की, जो एकदम से तुम्हारे साथ सिनेमा मैं चली गई। तो उसने बोला उसका एक मित्र है आज वो काफ़ी दिन बाद मिला था और वो मुझसे बोला चलो सुनिल आओ मैं तुम्हे अपनी कजिन से मिलाता हूं मैं उनके साथ चला गया और फिर उनके साथ सिनेमा भी देखा। सिनेमा देखने के बाद मैंने कहा, यार तुम तो काफ़ी तेज निकले, पहली बार मे ही उसे पटा लिया। तो वो मुझसे बोला अरे मैं आपको भी मिला दूंगा यार।

अगले दिन वो उसको डिनर पर ले आया और रेस्टोरेन्ट में बैठा कर मेरे पास आ गया। रेस्टोरेन्ट हमारे ऑफ़िस के पास ही था इस लिये वो जल्द ही मेरे पास आ गया मैंने बोला मैं क्या करूंगा यार वहां जाकर, वहां तो तुम्हारी गर्ल फ़्रेन्ड है तुमही एनजोय करो्। बोला नहीं यार चलो उसके साथ उसकि एक मित्र है आप उसके साथ सेटिंग कर लेना। उसके द्वारा काफ़ी दबाव डालने के बाद मैं उसके साथ चला गया। मैं जाकर देखता हूं कि सुनिल की गर्ल फ़्रेन्ड कहने की आवश्यकता नही थी कि वो बहुत ही खूबसुरत थी। एक बार तो मैं भी घबरा गया कि इतनी खूबसुरत लड़की इसे कहां से मिल गई। मैं उसके बगल मैं बैठ गया और बातें करने लगा क्योंकि मैं तो उसकि मित्र को फ़ोकस कर रहा था। इसलिये मेरा दिमाग उसकी तरफ़ लगा हुआ था। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं कि मेरी सेटिंग उसके साथ हो जाए।

वह मुझे ये मालूम हुआ के वो लोग यहां होस्टल मैं रहती है और यहां जोब करती है और उसकी मित्र यहां अभी कॉलेज मैं पढ रही है्। मैं आपको सुनिल की गर्ल फ़्रेन्ड का नाम बताना भूल गया उसका नाम (उर्वशी)था और उसकी मित्र का नाम अनीता था। डिनर के बाद वो लोग वहां से चली गई। सुनिल मेरे से बोला क्या हुआ कुछ सेटिंग हुई या नहीं। मैंने बोला- यार कुछ हो नहीं पाया। बोला- कोई बात नहीं, मैं उर्वशी को बोलकर तुम्हारी सेटिंग करा दूंगा। मैं बोला- ओके।

इसके बाद लगभग छः माह बाद सुनिल बोला- मै बंगलोर जा रहा हूं साथ मैं उर्वशी भी जा रही है।

मैं बोला- फिर तो पूरा एनजोय करोगे?

बोला- नहीं, यार वो बोल रही है कि मेरे लिये अलग से कमरा बुक करना।

इस बीच उर्वशी मुझे रेगुलर फोन करती थी और मैं उससे मिलने जाता था। जब वो लोग बंगलौर जा रहे थे तो मैंने उर्वशी को बोला कि आप लोग जा रहे हो, सभी कुछ मंगलमय हो, आपकी यात्रा सुखद रहे। बैंगलोर से आने के बाद वो मेरे लिये गिफ़्ट लेकर आई, लेकिन सुनिल मेरे लिये कुछ नहीं लाया मैंने पूछा- यार तुम मेरे लिये कुछ लेकर नहीं आये। बोला- यार एक ही बात है अब कुछ ही दिन में मैं उर्वशी से शादी कर लूंगा। मैं बोला- यह क्या कह रहे हो, तुम तो एन्गेजेड हो। बोला- उर्वशी से शादी करूंगा। मैं बोला- उर्वशी को मालूम है कि तुम्हारी एन्गेजमेन्ट हो चुकी है। बोला- अभी नहीं मालूम लेकिन मैं उसे ये सब बता दूंगा। मैं बोला- यह बात गलत है आप उसे साफ़ साफ़ कहो अगर वो आपके साथ वो राजी हो, तभी आप उससे मिलो वरना उससे मिलना छोड़ दो। यहीं से मेरी और सुनील कि खटपट होने लगी।

मैं ने उर्वशी को बता दिया कि सुनिल की एन्गेजमेन्ट हो चुकी है। उसे बहुत दुख हुआ लेकिन उसने दृढता के साथ के साथ कहा सुनिल मेरे साथ ही शादी करेगा। इस बीच उर्वशी के फोन काफ़ी आने लगे थे मेरे पास और वो बोलती थी कि आ जाओ मुझे आपसे कुछ बात करनी है। मैं भी उससे रेगुलर मिलने लगा। अब वो कुछ दिन के लिये अपने होम सिटी जा रही थी। मैं उसे जब छोड़ने गया तो उसने मुझसे बोला कि आप मुझे मेरे घर पर फोन करना।

उसके कहने का अन्दाज़ ऐसा था उसकी सेक्सी आंखो में मैं डूब गया और उस रात मैं बिलकुल सो नहीं सका। अगले दिन मैंने उसे दिन को दो बजे फोन किया। एक ही बेल पर उसने फोन उठा लिया और बोली- मुझे मालूम था कि आप फोन करोगे।

मैंने पूछा- आप कब वापस आ रही हैं।

उसने बोला- जब आप कहो।

मैं बोला- कल ही आ जाओ।

तो वो अगले दिन ही लौट कर आ गई और आने के बाद मुझे फोन किया कि मैं आ गई हूं। आप कब मिलने आ रहे है। मैं बोला मैं आपके होस्टल के गेट पर मिलता हूं।

फिर उसके बाद हम डिनर करेने गये और हम लोगो ने डिनर किया मैंने उससे पूछा कि यह बताओ कि आपने मुझे इस तरह से क्यों देखा था उस दिन स्टेशन पर। तो वो मुसकरा दी और बोली। आई लव यू साजिद्। मैं एक दम से चौंक गया। बोली- मैंने तो आपको उसी दिन अपने दिल मैं बैठा लिया था जिस दिन आप मुझसे पहली बार मिले थे। मैं बोला ओह्हह्हह्हह्ह तो आपने पेहले क्यों नहीं बोला। बोली- आप क्यों नहीं समझे एक लड़की लड़के को अपने पास क्यों बुलाती है।

फिर हम लोग खूब मिलते रहे। लेकिन सिरफ़ बागों में। किसेस भी खूब करते थे। एक दिन मैंने हिम्मत करके उससे कहा- मैं देहरादून जा रहा हूं एक दिन के लिये। आकर मिलते है। बोलि- मैं भी चलूं। मैं तो चाहता ही यही था। फिर अगले दिन हम लोग देहरादून के लिये रवाना हो गये। रात्री की बस थी। मैं बस मैं उसके साथ ओरल सेक्स कर रहा था, लेकिन बार- बार वो मना करती रही। मैं थोड़ी देर के लिये रुक जाता और फिर शुरू हो जाता। अब हम देहरादून पहुंच चुके थे। लगभग रात के दस बज रहे थे। कही डिनर का भी पता भी नही था। मैं सीधे होटल पहुंचा और एक रूम बुक कराया। होटल भी अच्छा था। उसके चार्जेज सात सौ रुपये था।

अब वो बोली- मैं भी इसी मैं रहूं आपके साथ।

मैं बोला- अगर नहीं रहना हो तो नीचे जाकर एक रूम और बुक कर लेते हैं।

बोली- कोई बात नहीं। इसी में शेयर कर लेंगे।

फिर वो फ़्रेश हुई और मैं भी फ़्रेश होकर बेड पर लैट गया। अब हम लोगो ने सेक्स कि बातें आरम्भ कर दी। धीरे धीरे मैंने उसकी जांघ पर अपना हाथ रख दिया और कंधो को सहलाया। उसने ब्रा भी नहीं पहनी हुइ थी। लेकिन मैं फिर भी टॉयलेट के बहाने उठा और देखा के टॉयलेट मैं उसकी ब्रा और पेन्टी उतार कर रखी हुई थी। अब मैं भी रेलक्स होकर बेड पर आ गया मैं भी अपना अंडरवियर उतार कर टॉयलेट मैं रख दिया था। मैंने दोबारा से अपना एक हाथ उसकी जांघो पर रख दिया और बातें करने लगा। उसने भी मुस्करा कर उत्तर दिया। फिर मैंने उसकी चूंचियों पर अपना दूसरा हाथ रख दिया और उसे दबाने लगा और जांघो पर मसलने लगा। वो बोली येह क्या कर रहे हो। मैं बोला कुछ नहीं होगा। बोली यह सब अच्छा नहीं है। मैंने कहा मैं सिर्फ़ ओरल करूंगा तो वो ओरल के लिये राजी हो गई।

फिर मैं उसके पेट को चूमने लगा। धीरे धीरे मैं उसकि पूरे जिस्म को चूमने लगा। अब वो भी बहुत गरम हो रही थी। अब उसे भी मज़ा आने लगा था। मैंने धीरे से उसका नाड़ा खोल दिया और उसकी चूत पर हाथ लगाया। वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और चिप चिपा रही थी। मैं ने धीरे से अपनी एक अंगुली उसकी चूत मैं डाली। फिर धीरे धीरे मैंने उसके पूरे कपड़े उतार दिये। फिर मैंने उसकी चूंचियां को चूसना आरम्भ कर दिया। उसके गुलाबी उरोज के निप्पल अब पूरी तरह से कड़क हो चुके थे। वो पूरी तरह से गरम हो चुकी थी। मैंने उसको बोला मेरे लण्ड को चूसो। वो बोलि नहीं। फिर मेरे समझाने पर उसने लण्ड को खूब चूसा। उसके चूसते चूसते दस पन्द्रह मिनट में मै झड़ गया। मेरा सारा माल उसके मुख मैं था।

वो बोली- क्या करूं?

मैंने बोला- अगर पीना है तो पी लो ! नहीं तो बाथरूम में थूक दो।

बोली- आज पीकर देखती हूं।

फिर मैं उसके मुख में लण्ड दबाता रहा और वो मेरे लण्ड को अपने हाथ से भी फिर से मुठ्ठ मारने लगी।

मेरा नौ इन्च का लण्ड फिर से तैयार था। उसे चोदने को लण्ड फ़ड़फ़ड़ा रहा था। वो भी पूरी तरह से चुदने के लिये तैयार थी। चुदाई से पहले हम दोनों में एक शर्त लगी कि पहले कौन झड़ेगा?

वो बोली- मैं आपको दस मिनट में झड़ा दूंगी।

मैं बोला- नहीं कर सकती।

मैं डाल कर भूल गया, वो चिल्लाती रही- करो नाआआआआआआआअ चोदो ! अब मुझसे नहीं रहा जा रहा।

मैं बोला- अभी तुम झर जाओ, मैं तो बाद मैं ही करूंगा।

बोली- नहीं मेरी फ़ाड़ो जल्दी से।

फिर वो मेरे ऊपर आ गई और खूब उसने शॉट लगाए और मैं भी अब पूरी तरह से रेडी हो चुका था फिर मैंने भी खूब जबरदस्त धक्के लगाये। फिर उसी की चूत मे झड़ गया। वो बोली आपने मुझे दो बार डिस्चार्ज करवा दिया। फिर यह सिलसिला पूरी रात चला जरा सोचिये मैंने उसे पूरी रात में छः बार चोदा। अब मैं पूरी तरह से टूट चुका था और मेरा पूरा शरीर थक गया था।

मैं लगभग सुबह छः बजे सोया था और ग्यारह बजे उठा। तब मै फ़्रेश हुआ फिर उर्वशी भी फ़्रेश होने गई। उसने मुझे भी अन्दर बुला लिया और फिर अन्दर भी हम दोनो ने बहुत मज़ा लिया और दिन भर फिर हम लोग चुदाई ही करते रहे। बहुत मज़ा आया फिर बस मैंने उसे चोदा क्योंकि बस मैं हमारे अलावा एक न्यूली मेरीड कपल था उस कपल ने भी बस मैं ही अपनी पत्नी को चोदा और मैंने भी खूब सेक्स किया....

 हाय मेरा नाम नेहा है। मैं मुंबई में रहती हूँ मेरे मामा का घर कोटा में है। मैं मेरे मामा के ६ साल बाद जा रही थी।
 
 
जब हम मामा के घर पहुंचे तो मेरे मामा का लड़का मुझे पहचान न सका क्यूंकि जब उसने मुझे देखा था तो मैं १३ साल की बच्ची थी, लेकिन मैं अब बड़ी हो गयी हूँ। मुझे टाईट जींस और शरीर पर चिपका हुआ टॉप पहनने की आदत है। मैं दिखने में काफी खूबसूरत लड़की हूँ मेरे मुंबई में भी पाच बॉयफ्रेंड है। लेकिन जब मैंने मामा के लड़के गौरव को देखा तो मैं दंग रह गई।
 
 
वह तो बहुत हट्टा कट्टा और ६ फ़ुट हाईट का था। मैंने उसे देखते ही उस से चुदवाने का मन बना लिया। मेरी मम्मी और हम जब पहले दिन घर पर रुके। त्यों मैंने नोट किया कि मेरे मामा का लड़का मुझ पर चांस मार रहा है। मैंने भी इस बात का फायदा उठाने का मूड बना लिया।
 
 
सर्दियों के दिन थे मेरे मामा का छोटा लड़का एक नई हिंदी मूवी धमाल की सी डी लाया। सब जमीन पर गद्दे बिछाकर रजाई ओडकर मूवी देखने लगे। मैं जानबूझ कर मेरे मामा के लड़के गौरव की रजाई में पैर डालकर बैठ गयी। फिर धीरे धीरे उसकी रजाई में पूरी घुस गयी तभी उसने जानबूझ कर मेरे जांघ पर अपना हाथ रख दिया और धीरे धीरे मेरी जांघ पर अपना हाथ फिरने लगा।
 
फिर उसने मेरी जेंस की जिप खोलने की कोशिश की तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर हटा दिया और कहा कि यह नो एंट्री है।
 
वह बोला नो एंट्री में तो जुर्माना देकर घुस सकते हैं।
 
तो मैं बोली कि पहले जुर्माना दो फिर घुसना।
 
तो उसने अपना ९ इंच लम्बा लंड मेरे हाथ में रख दिया और बोला यह लो तुम्हारा जुर्माना और अब मुझे नो एंट्री मैं जाने दो यह कहकर उसने मेरी जिप खोली और मेरी पैंटी पर हाथ फेरने लगा फिर उसने पैंटी सरकाकर मेरी चूत छूने की कोशिश की पर मेरी जेंस बिलकुल टाईट होने के कारण छू न सका।
 
फिर मैंने अपना पेट अन्दर पिचकाकर उसे मेरी चूत पर हाथ लगाने दिया आज ही मैंने उससे चुदवाने के लिए अपनी चूत पर वीट लगाकर बाल साफ़ किये थे, इस कारण वह मेरी चूत पर फ़िदा हो गया।
फिर मैंने जबरजस्ती उसका हाथ अपनी चूत पर से हटाया और उठ कर अपने गेस्ट रूम मैं जाने लगी तो वह जाते समय मेरे कान मैं बोला कि रात को एक बजे मैं तुम्हारा अपने कमरे मैं इंतज़ार करूंगा तुम आ जाना पर मैं जानबूझ कर न कहकर चली गयी तो उसका चेहरा उतर गया।
 
अचानक मैं रात को एक बजे उसके कमरे में पहुंची तो शायद वह निराशा में सो गया था, पर उसके कमरे का दरवाजा खुला था। मैं अन्दर गयी और उसका मुंह पकड़ कर चूम लिया।
इतने में ही वह जाग गया मुझे देखा कर ख़ुशी से फूला न समाया और तुंरत ही उसने मुझे निःवस्त्र कर दिया और फिर अपने कपडे भी खोल दिए और अपना लंड मेरे मुह में रखकर चूसाने लगा। मैंने १० मिनट तक उसका लंड चूसा जब तक वह मेरे बोबे दबाने लगा जब वह एक बार मेरे मुंह में ही स्खलित हो गया तो फिर मैंने उससे कहा कि मुझे तो अपना लंड चूसा दिया, अब मेरी चूत चाटो वह तुंरत ही मेरी चिकनी चूत चाटने लगा।
 
फिर जब मैं पूरी तरह से गरम हो गयी तो बोली कि राजा अब नहीं सहा जाता तो वह मेरी जांघो को चोड़ी कर बैठ गया और अपना ९ इंच लम्बा लंड मेरी चूत पर टिका कर एक ही झटके में आधा लंड मेरी चूत मैं घुसा दिया मैं आआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् चीखी फिर मैंने उसे रुकने को कहा पर उसने मेरी एक न सुनी पर कुछ ही पल बाद मुझे भी मजा आने लगा तो मैं बोली आआआआह्ह्ह राजा और जोर से फक मी फक मी और फिर उसने मुझे रात भर में ३ बार चोदा हम सात दिन वहां रहे और मैं रोज उसको जवानी के मजे देती रही।
 
पर अब मैं वापस मुंबई मैं हूँ और मुझे एक ऐसे सेक्स पार्टनर की जरुरत है जो मेरी गौरव की कमी को पूरा कर सके क्यूंकि मुझे अब मेरे पांचो बोयाफ्रेंडो के साथ सेक्स मी मजा नहीं आता।
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हेल्लो दोस्तो, मैं राजवीर एक बार फिर से हाजिर हूँ एक नई दास्ताँ लेकर ! मैंने कई कहानियाँ लिखी, कई सारे मेल आये। कुछ कहते हैं झूठ है, कुछ कहते हैं सच है। हुआ मेरे साथ है, मुझे पता है जिसको लगता है कि झूठ है तो पढ़ो और मजे लो। जिसको लगता है सच है वो तो मजे लेगा ही। लेकिन जो लिखता हूँ वो सब सच है। तो ऐसे ही मेरे शहर की एक लड़की मेरे कहानियों से खुश होकर मुझे मेल किया और कहा- मुझे आपसे दोस्ती करनी है।


मैंने जब उसके बारे में पूछा तो उसने बस अपना नाम बताया, उम्र भी नहीं बताई और कहा- बाद में बता दूँगी।
 
मेरे बारे में सब पूछा।
 
अब वो मेरे समय पर, जब मैं ऑनलाइन रहता, तब ही वो आती और मेरे से बात करती।
उसने बताया कि वो अपने माँ बाप की एकलौती बेटी है, उसके पापा रोहन 40 साल के और माँ दिव्या 38 साल की।
 
मैंने अंदाजा लगा लिया कि इसकी भी उम्र 20 से कम होगी, उसका नाम सोनिया था। सोनिया दसवीं कक्षा में पढ़ती थी। धीरे धीरे हमारी बात बढ़ने लगी, अब उसने अपना नंबर मुझे दे दिया और मेरा नंबर ले लिया। अब वो जब भी फ्री होती थी तब मेरे से बात करती थी। उसने मुझे बताया कि मेरे घर में कोई कुछ नहीं बोलता चाहे कुछ भी करूँ। हम काफी अमीर हैं, घर में नौकर-चाकर हैं। हम खूब बातें करने लगे। रात दिन सुबह 5 बजे से रात के एक-दो बजे तक।
सोनिया कहने लगी कि मुझे न नींद आती है, न भूख लगती है, न कहीं मन लगता है।
शायद उसको मुझसे प्यार हो गया था।
 
एक दिन कह ही दिया उसने मुझे- आई लव यू !
वो मेरे बारे में सारा जानती थी लेकिन मैं उसके बारे में कुछ नहीं जानता था इसलिए मैंने उससे कहा- मैं तुम्हारे बारे में कुछ नहीं जाता, फिर तुम्हें कैसे जवाब दे सकता हूँ।
उसके कहा- ठीक है, कोई नहीं, जब मिलोगे तब बता देना।
दो महीने में हम एक दूसरे के करीब आ गए। वो मेरा खूब ख्याल रखती थी, खाना खाया या नहीं, अपना ध्यान रखो, और भी बहुत कुछ !
मुझे भी अब लग रहा था कि मुझे उससे प्यार हो गया है, मैंने भी उसे प्यार का इजहार कर दिया, उसने भी हाँ कर दी। हमने एक दूसरे को अभी तक देखा नहीं है। अब हम थोड़ी थोड़ी सेक्स की बातें करने लगे। जैसे एक दिन की बात है:
सोनिया- तुम्हारा कितना बड़ा है।
मैं- मिलोगी तो अपने आप देख लेना।
सोनिया- फिर भी बता दो।
मैं- छः इंच
मैं- तुम्हारी चूची कितनी बड़ी हैं?
सोनिया- छोटी हैं, बड़ी नहीं है, निम्बू जैसी।
मैं- चूत कैसी है? बाल है वहाँ पे?
सोनिया- कसी हुई, बाल नहीं है।
सोनिया- तुम मुट्ठ मारते हो?
मैं- कभी कभी जब ज्यादा मन करता है और कोई नहीं होती।
मैं- और तुम उंगली करती हो?
सोनिया- नहीं, लेकिन रब करती हूँ कभी कभी।
मैं- मेरा लोगी?
सोनिया- हाँ जरूर ! तीनों छेदों में ! लेकिन प्यार से डालना। अभी कच्ची कलि हूँ, कुंवारी हूँ, कहीं जान न निकल जाये।
मैं- जानू, तुम तो मेरी जान हो, तुम्हारी जान कैसे निकालूँगा मैं !
उसकी सहेली भी काफी अमीर थी। मैं उसके घर गया और घंटी बजाई, उसकी नौकरानी ने दरवाजा खोला। उसकी नौकरानी करीब 25 साल की होगी। मोटे मोटे चूचे, मस्त गांड।
मैंने सोचा कि नौकरानी इतनी मस्त है तो मालकिन कैसी होगी।
उसकी नौकरानी ने मुझे अंदर बुलाया और बैठाया और कहा- छोटी मालकिन अभी आ रही हैं।
और वो मुझे बार बार घूर कर देख रही थी।
तभी दो लड़कियों के हंसने की आवाज आई। वो दोनों सीढ़ियों से आ रही थी। उसकी सहेली का नाम नेहा था, दोनों आई, एक ही उम्र 18 की होंगी।
एक ने कहा- पहचानो कौन है वो जो आपके सपनों में आती है?
वो मुस्कुरा रही थी और कभी मुझे और कभी दूसरी को देखती।
मैंने कहा- मेरे सपनों में जो आती है आज तो वो चुपचाप खड़ी है, बोल भी नहीं रही।
तभी सोनिया बोली- मैं बस देख रही थी कि तुम मुझे पहचानते हो या नहीं।
फिर नेहा सोनिया के कान में कुछ बोली और नौकरानी को जाने को बोल कर कहने लगी- मुझे कुछ काम है, मैं बाहर जा रही हूँ, 2-3 घंटे लगेंगे।
वो चली गई।
सोनिया आज क़यामत लग रही थी, लहंगा-चोली पहन रखी थी उसने, मानो ऐसा लग रहा था जैसी किसी पार्टी में जा रही हो।
वो मेरे साथ बैठ गई और बातें करने लगे। उसने अपनी उम्र 18 साल बताई। मैंने उससे कहा- यार तुम मेरे से 2 साल छोटी हो।
सोनिया ने कहा- प्यार उम्र नहीं देखता। मैं इसलिए मिलने से मना कर रही थी लेकिन तुम ही जिद कर रहे थे। अब तुम मेरे से प्यार करो या मत करो लेकिन मैं तुमसे ही प्यार करती रहूँगी।
इतना कहते ही उसने अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिए और चुम्बन करने लगी। मैं इसके लिए तैयार नहीं था लेकिन थोड़ी देर में मुझे भी मजा आने लगा और मैं भी साथ देने लगा था पर मैं यह सब अभी नहीं करना चाहता था, मैं उससे प्यार करने लगा था, सेक्स के बारे में तो कभी सोचा ही नहीं। मैंने उससे प्यार किया था उसके बदन से नहीं !
 
जबकि उस समय वो ऐसी लग रही थी मानो स्वर्ग से आई हो, किसी की भी नीयत उस वक्त ख़राब हो सकती थी उस पे। मैंने उसे रोकना चाहा, उसे अपने से अलग किया और कहा- यह ठीक नहीं है।
इतना सुनते ही उसने मेरा हाथ पकड़ा और कमरे में ले गई और कमरा बंद किया, मुझे बिस्तर पर धक्का दिया, बिस्तर फूलों से सजाया हुआ था और अपने कपड़े उतारने लगी और थोड़ी ही देर में नंगी हो गई, आकर मेरे से चिपक गई, बेहिसाब चूमने लगी।
आखिर मैं भी इंसान हूँ, कब तक सब्र करता, मेरा भी सब्र का बाँध टूट गया, मैं भी अब उसका साथ देने लगा।
उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, मैं भी उसके सामने बिल्कुल नंगा था, मैं उसकी चूची चूस रहा था जो सच में निम्बू जैसी ही थी, कभी दाईं चूची, कभी बायीं चूची।
मैं धीरे धीरे नीचे आया जहाँ चूत होती है और चूत चाटने लगा। एकदम साफ़ और गुलाबी चूत जिस पर एक भी बाल नहीं था। सोनिया सिसकारियाँ ले रही थी, मुझे भी मजा आ रहा था।इसी बीच सोनिया झर गई। अब मेरे लंड को पास से देखते ही बोली- यार, ये क्या मेरे में चला जायेगा/
मैंने कहा- मुँह में डाल कर दखो, अगर मुँह में चला जायेगा तो चूत में भी चला जायेगा।
इतना कहने पर वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। कभी मुँह में रख कर टाफी की तरफ चूसती तो कभी आगे पीछे करके चूसती, तो कभी गोलियों को चूसती। मुझे खूब मजा आ रहा था, मैं झरने वाला था, उससे पूछा- कहाँ लोगी मेरा माल? मुँह में या बदन पे?
उसने कहा- स्वाद तो ले के देखने दो कि कैसा लगता है।
और मेरा पूरा माल अंदर ले गई। वो बाहर गई और रसोई से दो बीअर ले आई। दोनों ने बैठ कर बीयर पी, उसने आधी बोतल, मैंने डेढ़ बोतल।
दोनों को हल्का सा सरूर छा गया, हम एक दूसरे को चूमने लगे।
मैं फिर उसकी चूत चाटने लगा, कुछ देर बाद वो मेरा लंड चूसने लगी।
अब उसने कहा- अब नहीं रहा जाता, डाल दो अपना सांप मेरे बिल में !
मैंने थोड़ा तेल लगाया अपने लंड पर और उसकी चूत में !
 
एक-दो बार धक्के दिए, पर अंदर नहीं गया। उसकी चूत उम्र के हिसाब से कसी थी। फिर मैंने उसे जोर से पकड़ कर एक धक्का दिया, आधा लंड अंदर चला गया।
वो बहुत तेज चिल्लाई, उसकी चूत से खून की धारा बहने लगी और आँखों से आँसुओं की धारा !
मैंने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया और उसे चूमने लगा, उसकी चूची चूसने लगा, सहलाने लगा।
जब थोड़ा आराम हुआ तो मैंने एक और धक्का दिया और पूरा सांप बिल में ! पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया, उसकी सांस एकदम रुक सी गई।
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और चूमने लगा। कुछ देर बाद वो नीचे से गांड हिलाने लगी तब मैंने भी उसका साथ देना शुरू किया और आगे-पीछे होने लगा।
फिर 15 मिनट तक लंड और चूत की लड़ाई होती रही और चूत लंड के सामने पानी पानी हो गई और लंड ने एक बौछार चूत में फेंक दी और चूत उसकी दीवानी हो गई।
हम दोनों आराम से पड़े हुए थे, सोनिया उठी और बिस्तर और अपने आप को देख कर घबरा गई। उसकी गांड-चूत खून से सनी हुई थी और बिस्तर भी।
मैंने उसे बताया- पहली बार होता है, बाद में सब ठीक हो जाता है।
उसे चलने में दिक्कत हो रही थी। फिर हम नहाये, कपड़े पहने और बाहर गए, होटल में खाना खाया, मूवी देखी, खूब घूमे और फिर आ गए वही चोदा-चादी का खेल खेलने।
तब नेहा घर पर ही आ चुकी थी, हमारी सारी आवाजे उसको सुनाई दे रही थी।
उसके बाद हमें जब भी मौका मिला, मजे किये, गांड-चूत में हमने ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ हमने एक दूसरे को छोड़ा हो। उसको सेक्स का भूत सवार हो गया था, हफ्ते में दो बार उसको सेक्स करना ही है और वो भी मेरे साथ, कहती है किसी का ख्याल मैं आज तक अपने दिल में नहीं लाई।
वो मुझ से सच में प्यार करने लगी थी उसकी कोई सेक्स की भूख नहीं थी, सेक्स तो शरीर की जरुरत है।
मैं उसे कहता- प्यार सेक्स से बड़ी चीज है, प्यार जिंदगी भर क्या, सदियों का होता है और सेक्स दो पल का मजा।
मैं भी उसे बहुत प्यार करता था लेकिन एक दिन उसका एक्सीडेंट हो गया और वो मुझे छोड़ कर चली गई।
लेकिन उसकी याद अभी भी मेरे दिल में बसी हुई है।
 
 
आई मिस यू सोनिया !